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छ दिन बीत गए और ऐसे ही लगता है जैसे कल की ही बात हो कि संडे वाले दिन मैंने गार्डन ओवरव्यू बनाया था। वक्त का आजकल तो पता ही नहीं चलता। आज है नवंबर की 9 तारीख और आज के दिन हमारे यह तीनों रेस्ड बेड बिल्कुल रेडी हो चुके हैं। बस तीसरे वाले में मिट्टी डालना बाकी है। संडे वाले दिन का ओवरव्यू आपको मालूम है सब्जियों की अपडेट के ऊपर होता है और आने वाले हर संडे वाले दिन यही हुआ करेगा। क्योंकि अब सिर्फ और सिर्फ वेजिटेबल गार्डनिंग ही होगी और कोई गार्डनिंग नहीं। हां, आने वाले टाइम में सीजनल फ्लावर्स भी हम साथ में लेकर चलेंगे क्योंकि फ्लावर्स के बिना वेजिटेबल गार्डन बिल्कुल भी सजदा नहीं है और ना ही पॉलिनेटर्स ज्यादा आते हैं। जब सब्जी वाले पौधों के साथ में फूलों वाले पौधे भी होंगे और फूल लगे होंगे तो पोलिनेटर्स यानी रस चूसने वाले कीड़े मक्खियां आएंगी। तो एक फूल से दूसरे फूल पर जाएंगी तो पोलिनेशन हो जाती है। फिर उस फूल में से सब्जी भी बन सकेगी। यह कुदरत के करीब रहने का तरीका है। तो बेड बिल्कुल रेडी हो चुके हैं। यह सोने वाला बेड नहीं है बल्कि जमीन से उठा हुआ बेड है। इसीलिए इसको रेज्ड बेड कहते हैं। अभी वहां से शुरू करता हूं। माशा्लाह काफी अच्छी ग्रोथ चल रही है। बताता हूं क्या-क्या लगा लिया। अभी यह सुराख जो आप देख रहे हैं ना मुझे मालूम है आपके ज़हन में यह आ रहा होगा सवाल कि यह सुराख क्यों हुए हैं इसमें। असल में जब मैंने मिट्टी भर ली ना तो पाइप की मदद से जब पानी देने लगा तो मिट्टी ज्यादा थी तो किनारों से पानी बाहर बहने लगा। इसलिए मैंने पाइप की मदद से थोड़े-थोड़े सुराख करता रहा तो पानी उन सुराखों में भरता रहा। नीचे वाली मिट्टी भी गीली हो गई। देखा कितना जीनियस बन गया हूं मैं। तो यह भी छनी हुई मिट्टी है। पूरे तीन दिन हमें लग गए मिट्टी छान छान कर इसमें भरते रहे। मैं और मेरा बेटा। और कल रात को ही मैंने यह वाला बेड भी उठाकर ईंटों के ऊपर रख दिया है। तो चलिए फिर अभी इसमें क्या लगाऊंगा यह तो आने वाले टाइम में अभी डिसाइड करूंगा। फिलहाल के लिए यह काम हमारा कंप्लीट हो गया। इसकी ही मुझे बहुत खुशी है अभी। तो सबसे पहले हम बेड से ही शुरू करेंगे। लहसुन मैंने लगा लिया था। पिछले संडे को आपने देखा था यह लहसुन काफी छोटा था और अब माशा्लाह देखिए लहसुन बड़ा हो गया और मैंने उनके किनारों पर मिट्टी भी चढ़ा दी ताकि इसका बल्ब नीचे वाली साइड पर ही बन सके। साथ कोराबी के पौधे यह भी अब बड़े हो रहे हैं और उसके साथ धनिया जो हमने उखाड़ कर यहां पर ट्रांसप्लांट किया था। माशा्लाह ग्रोथ उसकी भी अच्छी है। अभी मैंने कोई पत्ता इसका उतारा नहीं है खाने के लिए। और पत्तों का साइज देखिए कितना बड़ा पत्तों का साइज है ये। तो इसकी ग्रोथ भी हो रही है। देखिए तने भी बहुत खूबसूरती से अपने पांव पर खड़े हैं। चुकंदर के कुछ पौधे मैंने यहां पर भी ट्रांसप्लांट कर दिए थे क्योंकि इसके कुछ ज्यादा ही बीज मैंने एक डब्बे के अंदर डाल दिए तो वहां पर वह जर्मिनेट हो गए तो तो फिर पौधे के ऊपर पौधा लटकने की वजह से वह काफी सारे पौधे झुक रहे थे। तो मैंने उनको निकालकर कुछ को यहां पर लगा दिया। एक चेरी टोमेटो भी लगा दिया था बल्कि दो लगाए थे कि हो सकता है कि एक हमारा मुरझा जाए दूसरा सर्वाइव कर जाए। काफी लोग कहते हैं टमाटर के पौधों की ग्रोथ तेज क्यों नहीं हो रही? हमने तो ट्रांसप्लांट भी कर दिया है। तो मेरे भी ऐसा ही है। कोई इतनी बड़ी बात नहीं होती कि हमने पौधों को ट्रांसप्लांट किया है और फरी तौर पर उसकी ग्रोथ भी बढ़ना शुरू हो जाए। अगर आपके पौधे जिंदा हैं, अपने पांव पर खड़े हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। कोई खाद देने की जरूरत नहीं है। जैसे ही उनकी ग्रोथ शुरू हो गई तो फिर उसको रोकना मुश्किल हो जाएगा। टमाटर की ग्रोथ इतनी तेजी के साथ बढ़ती है जब बढ़ने पर आए तो। तो अभी पौधों की ग्रोथ थमी हुई है लेकिन पौधे खड़े हैं। अपने पांव पर मरे नहीं हैं। तो बस अभी इंतजार करते हैं। इनकी ग्रोथ शुरू हो ही जाएगी। और साथ में ब्रोकली के चार पौधे मैंने लगाए हुए थे। तो वो भी अपनी ग्रोथ को अच्छा बनाए हुए हैं। और एक मैंने पौधा दो पौधे मैंने मटर के इस कैरी के अंदर शिफ्ट कर दिए थे। ट्रांसप्लांट कर दिए थे कि देखने के लिए कि इसके अंदर ग्रोथ होती है या नहीं। क्योंकि यह छनी हुई साफ सुथरी मिट्टी है। और यहां पर जो गमलों के अंदर मैंने लगाया हुआ था ना मटर के पौधे इसमें लगे हुए थे। यहां पर एक गमला होता था उसके अंदर लगे होते थे। तो वहां से मैंने सभी को निकाल दिया। बस दो पौधे जो अच्छे चल रहे थे उनको मैंने क्यारी के अंदर शिफ्ट किया है। और इस डब्बे के अंदर जो पत्थर वाली मिट्टी थी वो सारी निकालकर छनी हुई मिट्टी मैंने भर दी है। अब इसके अंदर भी मैंने टमाटर के पौधे ट्रांसप्लांट कर दिए हैं। वह भी इंशाल्लाह बड़े हो जाएंगे और फल भी लगेगा। और उसके साथ लाल रंग का सलाद पत्ता वो पौधे मैंने ट्रांसप्लांट कर दिए। पिछले ओवरव्यू के अंदर यह वाले पौधे यानी लाल सलाद पत्ता के यहां पर नहीं थे और इस बार हैं और अगली बार यह बड़े भी हो रहे होंगे। तो यह पूरी की पूरी मैंने लाइन लाल रंग के सलाद पत्ता की लगा दी और साथ में लहसुन को ट्रांसप्लांट भी कर दिया। छोटे-छोटे से पौधे थे उनको मैंने ट्रांसप्लांट कर दिया। सॉरी प्याज के पौधे थे उनको ट्रांसप्लांट कर दिया। तो अब यह भी अपने पांव पर खड़ा होना शुरू हो चुके हैं। देखिए जो लटके लटके थे वो अब खड़े हो रहे हैं। जो नई शूट आएगी ना वो बिल्कुल सही आएगी और अपने पांव पर खड़ी रहेगी। और उसके आगे मैंने लगा दिए हैं जनाब। यह देखिए स्ट्रॉबेरी की रूट्स। आजकल नर्सरी से आपको स्ट्रॉबेरी की रूट्स मिल जाएंगी। वह लाइए और उसको लगा दीजिए कैरी के अंदर तो वह वहां से ग्रोथ शुरू कर देगी क्योंकि अभी भी मौसम में गर्मी है। जब बहुत ज्यादा ठंड शुरू हो जाएगी फिर रूट्स लगाने का फायदा नहीं होगा क्योंकि ठंड की वजह से नए पत्ते आ नहीं पाएंगे। पौधे की ग्रोथ हो नहीं पाएगी। जब बाहर के दिन आएंगे थोड़ा मौसम गर्म होगा तो पत्ते निकलने लगेंगे और पत्ते निकलने के बाद में गर्मी शुरू हो जाएगी। मार्च से अप्रैल के महीने में तो फिर पौधों की ग्रोथ बिल्कुल थम जाएगी और पौधे मुरझा जाएंगे। मर जाएंगे बिना स्ट्रॉबेरी दिए। इसलिए सर्दी शुरू होने से पहले इनकी रूट्स मिट्टी के अंदर लगा ली जाती हैं। ताकि थोड़ी गर्मी के मौसम में ही इनके पत्तों की ग्रोथ शुरू हो जाए। जब पौधों के पत्ते सही से खिल जाएंगे तो फोटोसिंथेसिस अच्छा होगा तो फिर वो फल पर भी आ जाएंगे। तो वो भी इसी क्यारी के अंदर लगा दिए हैं। अभी यह जो वाइट लाइन आपको दिख रही है ना धागा दिख रहा है इस लाइन में अभी कुछ और भी लगा सकते हैं। इतनी स्पेस हमारे पास इस रेज्ड बेड के अंदर है। चलिए जनाब अब इधर से शुरू करते हैं। मेथरे के पौधे अब बड़े हो गए हैं। अगर चाहे तो इनको हम ट्रांसप्लांट भी कर सकते हैं। लेकिन मैं ट्रांसप्लांट नहीं करूंगा इनको। इसी गमले के अंदर लेकर चलूंगा। थोड़े से और बड़े हो जाएंगे। फिर हम इनको उतार कर इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी पका भी सकते हैं। ज्यादा स्पेस होगी तो ज्यादा मेथी मिलेगी। लेकिन अब यह काटने के काबिल हो चुकी है। ऊपर ऊपर से हम काटते रहेंगे। नीचे से फिर से दोबारा से नए पत्ते आते रहेंगे। और इनको आप तकरीबन चार से पांच बार तो हार्वेस्टिंग ले ही सकते हैं। और कंपोस्ट के बारे में भी आपको बता दूं। यह जो बैग हम भर रहे थे तो यह फुल हो गया। अब इसके ऊपर ब्लैक सोइल डाल दी है। नीचे सारा ग्रीन मटेरियल है। किचन वेस्ट है। और उसके साथ मैंने एक और डब्बा भी रख दिया है। अब इसके अंदर भी कचरा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। बस कोशिश करें यह जो प्लास्टिक है ना यह ना जाने पाए। बाकी सब कुछ आप डाल सकते हैं। हरा मटेरियल। अब यह जैसा प्याज वगैरह और लहसुन के छिलके हैं। चाय की पत्ती है। धनिए के जो डंडे बच जाते हैं वो हैं। अंडे के छिलके हैं। वो सब कुछ जाएगा इसके अंदर और यह जो अंडे के छिलके हैं ना इसको थोड़ा सा आपने तोड़ देना है। तोड़ देना है ताकि यह जल्दी ब्रेकडाउन हो जाए। और यह याद आ गया यह जो लींबू है ना इसके छिलके आपने नहीं डालने क्योंकि यह एंटीफंगल और एंटीबक्टीरियल होते हैं। हमारे इस कल्चर के अंदर माइक्रोब्स इनको डीकंपोज कर रहे हैं। इसलिए उनकी तादाद कम ना हो जाए। वह मर ना जाए। लींबू यानी सिट्रिक एसिड हमने इसके अंदर नहीं जाने देना। नहीं तो कंपोस्ट बनने में बहुत देर हो जाएगी। बैक्टीरिया मर गए तो फिर यह जल्दी डीकंपोज नहीं होगा ना मटेरियल। इसलिए नींबू वाली कोई भी आइटम आपने इसमें नहीं डालने और कार्डबोर्ड भी डाल सकते हैं आप जिसको गत्ता कहते हैं ना। बस टेप वगैरह प्लास्टिक उसके ऊपर लगा हो पैकिंग के ऊपर तो उसको आप निकाल लीजिए। बाकी छोटे-छोटे पीसेस करके वह भी आप इसमें डाल सकते हैं। वह मैं बाद में डाल दूंगा। कार्डबोर्ड यानी कार्बन का सोर्स और ग्रीन मटेरियल यानी नाइट्रोजन का सोर्स। तो जब कार्बन और नाइट्रोजन मिलेगी और साथ में थोड़ी सी मिट्टी जिसके अंदर माइक्रोब्स हैं वो मिलेंगे तो ऐसी जबरदस्त कंपोस्ट बनेगी कि हम मार्केट से कोई और कंपोस्ट कभी नहीं खरीदेंगे। कभी कोई खाद नहीं खरीदेंगे। लेकिन इसको अभी लग जाएगा तकरीबन 1 साल। 1 साल के बाद हमारा यह गार्डन 80% के करीब ऑर्गेनिक हो जाएगा। हम घर में ही खादें बनाएंगे, घर में ही पेस्टिसाइड बनाएंगे। कुदरती तरीकों से या घर की जो रेमेडीज होती हैं किचन में किचन में पड़ी हुई उन्हीं के थ्रू बनाएंगे। बाजार से हमें बहुत कम सामान खरीदना पड़ेगा। कुलराबी के चार पौधे मैंने गमले के अंदर लगे रहने दिए और यह एक छोटा सा बिल्कुल अब नई ग्रोथ शुरू कर रहा है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे इन पौधों की ग्रोथ भी अच्छी होती जाएगी। और ब्रसल स्प्राउट के पौधे अब ट्रांसप्लांटिंग के काबिल हो चुके हैं। आज ही मैं इनको ट्रांसप्लांट कर दूंगा। अपनी इस कैरी के अंदर जहां पर पर यह धागा लगा हुआ है। इस लाइन में पौधों को ट्रांसप्लांट कर दूंगा। और ब्रोकली के कुछ पौधे मैंने गमले के अंदर लगे रहने दिए। तीन पौधे और उनकी ग्रोथ भी अब बढ़ रही है। साथ में टमाटर का पौधा था। दो नंबर वैरायटी थी। उसकी ग्रोथ भी हो रही है। लेकिन स्लो है लेकिन ग्रोथ स्टेबल है। हो जाएगी। बड़ी हो जाएगी। लाल लंबी मूली। उसके पौधे काफी बड़े हो गए और एक साइड पर झुक गए। जिस वजह से यह देखिए जो हिस्सा मिट्टी के अंदर होना चाहिए था वह हिस्सा मिट्टी से बाहर है। इस वजह से लाल मूली लंबे वाली सही से बन नहीं पाएगी जब तक कि यह हिस्सा मिट्टी के अंदर नहीं जाएगा। कुछ पौधों का हिस्सा मिट्टी के अंदर है वो सही से मूली बन जाएगी। लेकिन जिनका यह लाल हिस्सा थोड़ा सा बाहर है उनकी मूली बन नहीं पाएगी। यह जरा याद रखिएगा। जो भी रूट वेजिटेबल होती है ना मिट्टी के अंदर जो बनती हैं उनका वह हिस्सा मिट्टी के अंदर होगा तो ही वह फूल कर फल बनेगा। इसी तरह काली मूली है। यह तकरीबन अपने पांव पर खड़ी है। इसका मतलब कि काली मूली राउंड शेप में वह मिट्टी के अंदर बनेगी। ग्रोथ माशा्लाह अब तेजी से बढ़ने लगी है। ठंडा मौसम जो शुरू हो गया है। और जो पौधे मैंने एक्सपेरिमेंट के लिए बाद में लगाए थे लाल लंबी मूली, शलजम और यह दो दिन पहले ही मैंने लगाए हैं। ब्लैक राउंड मूली। इनके बीज मैंने आधा-आधा इंच मिट्टी के अंदर दबाए थे। यह देखने के लिए कि 1/2 इंच मिट्टी के अंदर दबाने की वजह से बीज उगेगा या नहीं। तो आपके सामने है पौधे अब बनना शुरू हो चुके हैं। और यह कुछ बीज अभी भी जर्मिनेशन अपनी शुरू कर रहे हैं। तो 1/2 इंच मिट्टी के लिए इसलिए मैंने इनको दबाया ताकि 1/2 इंच जैसे ही वह बाहर निकले पौधे और वहीं से पत्ते निकलना शुरू हो जाए और फल भी मिट्टी के अंदर बनना शुरू हो जाए। ना कि पौधे बहुत ज्यादा लंबे हो जाए और फिर जो हिस्सा फूलना है वो मिट्टी से बाहर रह जाए। जैसा कि हमारा यह लाल मूली का हो रहा है। यह वाला हिस्सा जो लाल है वह मिट्टी के अंदर होना चाहिए था ताकि वह फूल कर मूली की सूरत बन जाती। इसलिए मिट्टी के अंदर मैंने 1/2 इंच बीजों को दबा दिया था। और साथ ही बंद गोभी के बीज डाले थे। वो भी पौधे बन गए हैं और कुछ अभी ट्रांसप्लांटिंग के काबिल हो गए हैं। लेकिन अभी थोड़ा और इनको बड़ा करेंगे और उसके बाद ट्रांसप्लांट कर देंगे क्यारी के अंदर ही। क्योंकि अब तो क्यारियां बन रही हैं ना। कुछ सलाद पत्ता मैंने आम गमलों के अंदर भी लगा दिया था। जैसा कि यह जून का पौधा है। इसके अंदर भी मैंने लाल सलाद पत्ता के पौधों को ट्रांसप्लांट कर दिया। और इनकी ग्रोथ यहां पर शुरू भी हो चुकी है। क्योंकि इनको खाद की जरूरत नहीं होती। सिर्फ मिट्टी के अंदर ही लगा दिया जाए तो चलते रहते हैं। और एक टमाटर का पौधा मैंने अपने इस गमले के अंदर लगा दिया जिसके अंदर एशियन जैसमीन का पौधा लगा हुआ है जिसके पत्ते रंग बिरंगे निकलते रहते हैं। तो इसके अंदर एक पौधा मैंने टमाटर का भी लगा दिया है। ये रेगुलर टमाटर जो कि हमारे किचन में इस्तेमाल होते हैं वो है। और इसके अलावा मैंने क्यारियों के इस साइड पर गमलों को जोड़ दिया है जिसके अंदर टमाटर के पौधे लगे हुए हैं। और एक एक पौधा देखिए जो मैंने पिछले ओवरव्यू में आपको दिखाया था कि बीज उग रहा था टमाटर के गमले के अंदर ही तो उसको मैंने निकाला नहीं था। तो अब देखिए तीसरा पत्ता भी उसका खिलना शुरू हो गया है। अब यह टमाटर का पौधा है या नहीं यह तो इससे अगले ओवरव्यू में आपको पता चल ही जाएगा। यह चेरी टमाटो इसके अंदर लगाए हुए थे मैंने। यह वो पौधा है जो मैंने कहा था कि यह बहुत छोटा पौधा है। पता नहीं सर्वाइव करेगा या नहीं। लेकिन देखिए माशा्लाह अब यह बड़ा होना शुरू हो गया है। अभी इसको बूस्ट नहीं मिला ग्रोथ का लेकिन ग्रोथ स्टेबल है। मरा नहीं है। और पाक चोए की पनीरी भी अब बिल्कुल रेडी होने के करीब है। थोड़ी सी और बड़ी हो जाए ना इस तरह की होगी वो। थोड़ी सी और बड़ी हो जाए तो फिर इनको मैं निकाल कर कैरी के अंदर शिफ्ट कर दूंगा। चुकंदर के पौधों को मैंने ट्रांसप्लांट किया क्योंकि इस डब्बे के अंदर इतने ज्यादा बीज थे। आपने देखा भी था कि हमें मिट्टी देखने पर नजर नहीं आ रही थी तो पौधे एक साइड पर गिर रहे थे। जिस वजह से काफी सारे पौधे मुरझा भी सकते तो मैंने सभी पौधों को बाहर निकाला और मिट्टी को दोबारा से नरम बनाया और थोड़े-थोड़े फासले पर दो-दो तीन-तीन पौधों को ट्रांसप्लांट करता गया। अब इनमें से एक-दो पौधे मुरझा भी गए होंगे लेकिन अब इनकी नई ग्रोथ स्टेबल हो चुकी है। थोड़े से यह और बड़े हो जाएंगे तो फिर मैं दूसरा पौधा भी उखाड़ दूंगा। सिर्फ एक पौधा एक जगह पर लगा रहेगा ताकि वहां पर चुकंदर का राउंड गुलाई उसकी सही से बन सके। कुछ पौधों को मैंने इस डब्बे के अंदर लगा दिया था। इसकी ग्रोथ ज्यादा अच्छी आपको दिख रही होगी क्योंकि यह छनी हुई मिट्टी है और यह वाली मिट्टी वही पुरानी है। इसके अंदर पत्थर हैं, कोयले हैं। उस वजह से मिट्टी थोड़ी सी सख्त हो जाती है। तो ग्रोथ आपके सामने है। यह देख लीजिए और यह देख लीजिए कितना जमीन आसमान का फर्क है। छनी हुई मिट्टी का इतना फायदा होता है। तो साथ वाली में भी छनी हुई मिट्टी। यह भी लहस मैंने लगाया हुआ है गमले के अंदर ही और यह मैंने लगाया था 10वें महीने की मतलब अक्टूबर की 22 तारीख को गमले के अंदर ही तो इनकी ग्रोथ अब बढ़ना शुरू हो गई है। अभी मैं कुछ दिन के बाद मिट्टी लूंगा और मिट्टी इस गमले के अंदर और भी फिल कर दूंगा ताकि यह जो वाइट वाइट एरिया है ना यह सारे का सारा मिट्टी के नीचे ही दबा रहे। फिर यह जाकर सही से अपनी ग्रोथ को बढ़ा पाएगा। आयरन ऑक्साइड बनाने का एक तरीका मैं आपको बताता हूं। यह लोहे का हमम दस्ता था मेरे पास। तो, इसके अंदर मैंने पानी भर के रख लिया है। यह जो जंग वाला पानी है ना, यह है आयरन ऑक्साइड। यानी आयरन की कमी को पूरा करेगा आपके पौधे में। तो, 10 दिन के बाद, 15 दिन के बाद, 10 लीटर पानी के अंदर 1 लीटर यह वाला पानी आपने मिक्स करना है और हर गमले में हर पौधे के तने के पास में डाल दिया करें। इस तरह आयरन की कमी भी आपके पौधे में पूरी होती रहती है। फरी तौर पर यह पानी नहीं मिलेगा पौधों को, लेकिन जैसे-जैसे ब्रेकडाउन होता रहेगा, यह पौधों के लिए अवेलेबल फॉर्म में मिलता रहेगा। और यह रहा हमारा मूंगरे के पौधे। काफी बड़े हो गए। ट्रांसप्लांट नहीं किया मैंने। अब यह ऊपर वाली साइड पर और भी बड़े होंगे। फिर इनको फूल लगेंगे और मूंगरे भी बनना शुरू हो जाएंगे। यह रहा हमारा सलाद पत्ता। इस गमले के अंदर मैंने पनीरी तैयार की पहले और फिर सारी पनीरी को निकाला। कुछ को कैरी के अंदर लगाया। कुछ को दोबारा से इसी गमले के अंदर लगा दिया। यह मैंने लगाया था 19 तारीख वाले दिन यानी अक्टूबर की 19 तारीख को। चलिए जनाब यहां से तो हो गया कंप्लीट। और टमाटर के पौधे जो अभी बीज लगाए हुए थे वो भी बड़े हो रहे हैं। जब तक मेरी दूसरी क्यारी के अंदर मिट्टी भरी जाएगी तब तक ये ट्रांसप्लांटिंग के काबिल हो जाएंगे। फिर इनमें से हम कुछ-कुछ पौधे निकालेंगे और क्यारी के अंदर ट्रांसप्लांट कर देंगे। मटर के पौधे मैंने दूसरे गमले के अंदर लगा दिए थे। क्योंकि जो वहां पर पौधे पड़े हुए थे ना गमले पड़े हुए थे उसके अंदर बहुत ज्यादा पत्थर थे। क्योंकि वह सब्जी वाले पौधों के लिए मिट्टी बनाई ही नहीं थी मैंने। तो यह भी सब्जी वाले पौधों के लिए मिट्टी नहीं है। लेकिन इसके अंदर भी बहुत ज्यादा पत्थर हैं। लेकिन पौधों की ग्रोथ थोड़ी सी अच्छी हो रही है। इसके अंदर दोबारा से मैंने बीज डाले थे 24 अक्टूबर वाले दिन। तो अब देखिए मटर के पौधे बड़े हो रहे हैं। दो पौधे यहां से निकल आए। मैंने ज्यादा बीज डाले थे। हो सकता है कि कोई पौधे हमारे जिंदा ना रह पाए हो। हो सकता है कि कुछ पौधे बड़े हो जाए। तो ओवरऑल हमें कुछ ना कुछ तो मिलेगा। यह सिर्फ आप लोगों को दिखाने के लिए लगाए हैं कि मटर गमलों के अंदर भी चल सकते हैं। कोई खास खाद की जरूरत भी नहीं होती। अगर आपके पास अच्छे वाली ऑर्गेनिक खाद हो तो। हरी मिर्च का कोई भी सीड अभी तक जर्मिनेट नहीं हुआ है क्योंकि मौसम अब हो गया है ठंडा। तो ठंडे मौसम में मिर्च के बीज ओपन एरिया में जर्मिनेट नहीं होते या बहुत लेट होते हैं। इनको हमें प्लास्टिक से कवर करना पड़ता है। लेकिन इस साल मैं विंटर सीजन के लिए बिल्कुल पहले से प्रिपेयर नहीं था। इसलिए तो हर चीज थोड़ी-थोड़ी लेट हो गई है। हमारे यह मिट्टी वाला काम, क्यारियों वाला काम कंप्लीट हो जाए। फिर जो समर सीजन के लिए जो सब्जियां लगाएंगे ना उसके लिए हम पहले से ही तैयारी कर लेंगे। क्योंकि अकेले बंदे के लिए यह सब कुछ करना बहुत मुश्किल होता है। चलिए अब दूसरे टेरेस पर चलते हैं। इस छत के ऊपर भी जनाब देखिए गोभी के पौधे अब बड़े हो गए हैं। लेकिन अभी तक गोभी का कोई फूल नहीं बना। यह फूलगोभी के पौधे हैं। फूलगोभी के पौधे को जितनी ज्यादा ठंडक मिलेगी, उसके अंदर से जो फूल निकलेगा, वह उतना ही ज्यादा थिक रहेगा। यह जितने भी विंटर सीजन के पौधे दिखा रहा हूं ना, इनको ऑर्गेनिक सोइल बहुत अच्छी लगती है। यानी ऑर्गेनिक कंपोस्ट। चाहे वो किचन वेस्ट की कंपोस्ट हो, चाहे वो गाय के गोबर की कंपोस्ट हो, लेकिन वो डीकंपोज होनी चाहिए। आने वाले टाइम में हम इसके बारे में मजीद सीखते रहेंगे। गाजर के पौधे देखिए। आपको याद होगा मेरा यह डायलॉग कि आने वाले टाइम में हमें जमीन नजर नहीं आएगी जितने पत्ते होंगे। तो यह बिल्कुल वैसे ही हो रहा है। जंगल हमें दिख रहा है लेकिन मिट्टी हमें नजर नहीं आ रही। चलिए नीचे से देखते हैं। गाजर के तने अब मोटा होना शुरू हो चुके हैं। लेकिन अभी तक गाजर इनके नीचे नहीं बनी होगी या या फिर बहुत छोटी सी बनी होगी। जब गाजर बनना शुरू हो जाएगी ना तो थोड़ा-थोड़ा सा यह बाहर निकलना भी शुरू हो जाएगी। जिस तरह के मूली बाहर निकल आती है ना वैसे ही गाजर निकलना शुरू हो जाएगी। लेकिन यह भी मिट्टी छनी हुई नहीं थी। यह सारी मिट्टी जितनी भी मेरे इस टेरेस पर अभी आपको दिख रही है ना इनमें से कोई भी छनी हुई मिट्टी नहीं है। पुरानी मिट्टी हम जो बार-बार इस्तेमाल करते थे जिसमें हम हाउस प्लांट्स लगाते थे, कैक्टस लगाते थे, सेकुलेंट पौधे लगाते थे, पम स्टोन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल करता था। कोयलों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा करता था। लेकिन सब्जी वाले पौधों के लिए इनका ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाता। नहीं तो क्या होगा? अगर मूली या गाजर बन रही होगी मिट्टी के अंदर वहां पर कुछ पत्थर आ गए तो उसकी ग्रोथ वहीं पर रुक जाएगी। ऊपर से पत्तों की ग्रोथ होगी लेकिन फल मिट्टी के नीचे जा नहीं पाएगा। फैल नहीं पाएगा क्योंकि पत्थरों ने उसका रास्ता रोक लिया। इसलिए छनी हुई मिट्टी होगी। सब्जी वाले पौधों की ग्रोथ बहुत अच्छी चलती है उसके अंदर। तो यह धनिए के पौधे दोबारा से हार्वेस्टिंग के काबिल हो गए हैं। पिछले दिनों आपने आई थिंक तीन दिन पहले मैंने वीडियो अपलोड की थी धनिए को लगाने पर और मैंने हार्वेस्टिंग भी की थी। तो दोबारा से देखिए नए पत्ते फिर से बन गए हैं। अब यह आज फिर से उतरेंगे और हमारे किचन में इस्तेमाल होने वाले हैं। और इस ग्रो बैग के अंदर गुलाब की बेल थी। पिछले संडे आपने देखी थी कितनी ज्यादा इसकी ग्रोथ बढ़ चुकी थी और मैंने बताया था यह बहुत खुशबूदार फूल लगते हैं इसको। लेकिन मैंने सारे को काट दिया। सिर्फ यह दो ऊपर से बारीक-बारीक सी टहनियां ही छोड़ी हैं। और इसके ऊपर कलियां भी अब लगना शुरू हो गई हैं। इसको काटने का एक मकसद था मेरा क्योंकि जो सब्जी वाले पौधे हैं ना उनको प्रॉपर एक स्पेस मिलनी चाहिए। इसके अंदर मैंने टमाटर के पौधे भी ट्रांसप्लांट कर दिए थे। तो प्रॉपर स्पेस मिलेगी तो पौधों की ग्रोथ अच्छी होगी। और साथ वाले गमले के अंदर देखिए फूल ही फूल खिलते हैं। मैं अक्सर कहता हूं जितनी टहनियां होंगी उतनी ही कलियां होंगी और उतने ही फूल बनेंगे। तो बिल्कुल वैसा ही होता है। हर टहनी के ऊपर कली बनती है। फिर फूल खिल जाता है। यह तो यहां से बच्चों ने तोड़ लिए। यह दो फूल लगे हुए थे तोड़ लिए और जितनी टहनियां होंगी उतने ही फूल लगेंगे। तो यह एक खिल भी रहा है। देखिए कितना खूबसूरत पीले रंग का फूल। तो यहां पर मूली के पौधों के ऊपर ना पिछले दिनों बिल्ली आकर बैठ गई थी। तो यहां पर पत्ते सारे टूट गए थे। तो मैंने बहुत मुश्किल से पौधों को संभाला। जो पत्ते टूट गए थे उनको मैंने लिया और कंपोस्ट बीन में जहां कंपोस्ट बना रहा हूं वहां पर मैंने डाल दिए। अब इनकी ग्रोथ थोड़ी नए सिरे से आई है। नए पत्ते आना शुरू हुए हैं। अभी मूली बनना शुरू हो चुकी होगी लेकिन अभी इतनी भी थिक नहीं हुई होगी। यह देखिए। यह होता है सही तरीका कि मिट्टी से बिल्कुल बाहर निकलते साथ ही पत्तों की ग्रोथ शुरू हो जाए। तब नीचे सही से फल बनता है। और जो टहनी बहुत ज्यादा लंबी हो जाती है ना रूटेड वेजिटेबल की तो फिर फल मिट्टी के अंदर बन नहीं पाता। क्योंकि वह जड़ वाला हिस्सा मिट्टी के अंदर होगा। वही फूलेगा वही फल बनेगा। शलजम के साथ में पौधे लगे हुए हैं। यह शलजम के पौधे हैं। मूली के और शलजम के देखने पर एक जैसे लगते हैं दूर से लेकिन करीब से देखेंगे तो पता चलेगा। मूली के पत्ते थोड़े से कट्स वाले होते हैं। जैसा कि यह देख सकते हैं आप थोड़े-थोड़े फासले पर कट है। जो पत्ता बड़ा हो जाएगा उसमें भी कट्स आपको दिखेंगे। और जो शलजम के पौधे होते हैं वो देखिए आप। यह शलजम का पौधा है। इसका कट थोड़ा बड़ा है। थोड़े-थोड़े फासले पर हैं इसके कट्स। लेकिन जैसे-जैसे आपको जैसे-जैसे आप लगाते जाएंगे, आपको आईडिया होता जाएगा। और यह देखिए नीचे इसके अब शलजम बनने लगा है। यह पर्पल रंग आपको जो दिख रहा है ना, यह आने वाले टाइम में फूल कर शलजम बन जाएगा और शलजम आधा मिट्टी से बाहर होता है। आधा मिट्टी के अंदर होता है। ज्यादातर उसका हिस्सा मिट्टी से बाहर ही होगा। और जैसे-जैसे वो पकता जाएगा, बड़ा होता जाएगा, वो मिट्टी से बाहर निकलता जाएगा। काफी देर से बोल रहा हूं, सांस फूलना शुरू हो गई है। यहां पर भी मैंने टमाटरों के पौधों को शिफ्ट कर दिया था ताकि हमें हर जगह पर टमाटर देखने पर मिले आने वाले टाइम में। कुछ मकई के बीज भी डाल दिए थे मैंने और वह भी उग गए हैं। स्वीट कॉर्न है यह। आने वाले टाइम में यह बड़ी हो जाएगी। तो फिर यहां से हम कॉर्न उतारेंगे। और एक मटर का बीज मैंने जो ताज़ा होता है ना मटर जो हमारे किचन में इस्तेमाल होता है। सब्जी में से मैंने पका हुआ मटर निकाला जो सबसे बड़ा साइज होता है जिसका कलर थोड़ा चेंज हो रहा होता है जो मीठा नहीं रहता वो मैंने निकाला और यहां पर डाल दिया तो ये जर्मिनेट हो गया और यहां पर पौधा बनना शुरू हो गया और यहां पर भी देखिए यह बिल्कुल ताजे जो मटर होते हैं ना जो हम घर में इस्तेमाल करते हैं यह उनमें से निकाला हुआ बीज है। यह देखिए यह है बीज इसका और यहां पर यह जर्मिनेट हुआ और ऊपर से पौधा बन रहा है। यह बीज अब आने वाले टाइम में गल जाएगा और यह हिस्सा बन जाएगा इस पौधे की खाद का खाने का। इसी में हमारी बहुत ज्यादा धनिया उगा हुआ है। बहुत ज्यादा कसूरी मेथी जो बारीक पत्तों वाली होती है वो उगी हुई है। लेकिन धनिए की ग्रोथ मेथी की निस्बत बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। जितनी ज्यादा ठंड मिलेगी इसकी ग्रोथ उतनी ज्यादा तेज बढ़ेगी। लेकिन जब फ्रीजिंग टेंपरेचर पहुंच जाता है ना 5° तक टेंपरेचर रात के टाइम पहुंच जाए तो फिर इनके पत्तों का कलर थोड़ा रेड कलर में बदलने लगता है। इसलिए बहुत ज्यादा सर्दी से इसको बचाने के लिए कोई ना कोई शेडी एरिया जरूर बना दीजिएगा। चाहे ग्रीन नेट का शेड हो चाहे कोई और शेड ताकि रात की जो ओस पड़ती है ना उससे हमारे छोटे-छोटे से पौधे या फिर मटर के या फिर टमाटर के मटर के पौधे सेफ रह सके। यह देखिए पालक हमने उतारी थी दो दिन पहले की वीडियो में आपने देखा था। अब यह पत्ते फिर से बड़े हो गए हैं। आने वाले टाइम में यह बहुत ज्यादा बड़ी हो जाएगी। इन्हीं के हम इंशाल्लाह एक पौधा हम रखेंगे और उसका बीज भी बनाएंगे। हम आने वाले टाइम में पहले से ही अपने पौधों से इतने बीज ले लिया करेंगे ताकि आने वाला सीजन हमारा हमारे ही बीजों से बने ना कि हमें बाजार से बीज खरीदने पड़े। लेकिन कुछ बीज ऐसे भी होते हैं जो कि हमें बाजार से खरीदने पड़ते हैं क्योंकि हमारे पास इतनी स्पेस नहीं होती कि हम बीज भी तैयार कर सके घरों में। अगर जमीन है आपके पास तो फिर बीज आप बहुत आसानी के साथ तैयार कर सकते हैं। गमलों के अंदर भी हो सकता है। लेकिन अब किस-किस वैरायटी के हम बीज स्टोर करेंगे? क्योंकि बीज बनाने में काफी टाइम लग जाता है। 4 से 5 महीने या 6 महीने तक भी लग सकते हैं। इसमें इतने में अगला सीजन शुरू हो जाता है। हमने अगले सीजन की तैयारी भी तो करनी होती है। तो छोटी जगह होने पर यह परेशानियां तो हमें देखनी ही पड़ेंगी। लेकिन घबराने की जरूरत ही क्या है? बाजार से आजकल आराम से बीज मिल जाते हैं। आप लेकर उगा सकते हैं। लेकिन मैं कोशिश करूंगा मैक्सिमम से मैक्सिमम जो भी वैरायटी मैं लगाऊं उसका एक पौधा छोड़ दूं ताकि उसको फूल लगे और फिर उनमें से बीज भी बन सकें। और लेमन प्लांट को हम कुछ ही दिनों के बाद हार्ड प्रून करने वाले हैं। अभी भी बड़ा फल लगा हुआ है। रोजाना कुछ ना कुछ फल टूटता भी है और छोटा-छोटा सा बनता भी रहता है। इस साइड पर तो छोटे-छोटे से काफी सारे बन भी रहे हैं। यह देखिए। जब पौधा फल के ऊपर होता है ना तो उसके पत्ते निकालने की ग्रोथ थोड़ी स्लो हो जाती है क्योंकि उसका पूरे का पूरा फोकस अपने फल के साइज को बड़ा करने में और उसके अंदर रस भरने में लगा होता है। नए-नए शूट्स निकलने में काफी देर लगती है उसको। तो पौधे के ऊपर जब फल नहीं होगा तो तो पौधे का सारे का सारा फोकस अपनी नई-नई टहनियां निकालने में ही लगा रहेगा। बस यह आपको पता होना चाहिए। जब पौधे के ऊपर बहुत ज्यादा फल लग गया तो फिर उसकी पत्तों की और टहनियों की ग्रोथ कम हो जाएगी या बिल्कुल रुक जाएगी और जब पौधे के ऊपर कोई फल नहीं होगा तो फिर पौधे की ग्रोथ उसकी टहनियों की ग्रोथ बहुत तेजी के साथ बढ़ेगी और पत्ते भी काफी लश ग्रीन रहेंगे क्योंकि अब यह पत्ते पुराने होते जा रहे हैं तो पुराने पत्ते बूढ़े भी तो होंगे जैसे इंसान बूढ़े होकर मर जाते हैं वैसे यह पत्ते भी बूढ़े होकर इनका रंग बदल जाता है और फिर पीले होकर गिर जाते हैं। यह कुदरत का कानून है। कोई इंसान का कानून नहीं। हमारे यहां पर बैंगन के पौधे गमलों के अंदर लगे हुए इनको मैंने डोरमेंट कर दिया है और आने वाले टाइम में यह और भी डोरमेंसी में चले जाएंगे क्योंकि छोटी जगह होगी और मौसम ठंडा होगा तो यह पौधे डोरमेंट हो जाएंगे। इनकी जड़ों को मैंने नीचे से काट भी दिया था ताकि इनकी ग्रोथ थोड़ी रुक जाए, थम जाए लेकिन यह थमती ही नहीं है। देखिए फिर से फूल लगना शुरू हो गए हैं बैंगन के पौधों को और यह बैंगन देखिए छोटा सा बनना भी शुरू हो गया है। हद हो गई है। करूं तो क्या करूं? लोग कहते हैं बैंगन लगते नहीं है। मैं कहता हूं बैंगन उगने से रुकते ही नहीं है। मैं इनको कह रहा हूं पौधों को कि डोरेंट हो जाओ। अभी तुम्हारा आराम करने का टाइम शुरू हो। लेकिन यह हैं कि इनके किस्मत में आराम करना है ही नहीं। लेकिन आराम कर लेंगे तो अच्छा होगा ताकि जैसे ही फरवरी का महीना शुरू होगा इनको मैं बड़ी स्पेस पर लगा दूंगा। तो इनकी ग्रोथ आगे से बढ़ना शुरू हो जाएगी। बस आज का ओवरव्यू यही था। आपने जो बीज लगाए थे उनका क्या रिजल्ट मिल रहा है और आपको कैसा लग रहा है कि अब सिर्फ और सिर्फ वीडियोस वेजिटेबल गार्डन पर ही आती हैं और उसका प्रूफ तो आपको मिल ही गया। यह जो ढेर देख रहे हैं ना इतना बड़ा सा ढेर यह अभी आधा भी नहीं है। अभी आधी से ज्यादा मैंने मिट्टी छाननी है। तो सारे पत्थर जितने भी थे वह सब निकाल निकाल कर यहां पर ढेर लगा लिया है। अभी इसको मैं फेंकूंगा नहीं। अभी भी इसके अंदर थोड़ी बहुत मिट्टी है। जो पत्थर है ना मिट्टी के इनको मैं बड़े टब के अंदर पानी के अंदर डुबो दूंगा 24 घंटे के लिए और 24 घंटे के बाद उसको हलाकर बाहर निकाल लूंगा यानी पत्थरों को और मिट्टी पानी के नीचे बैठ जाएगी। इस तरह सारी मिट्टी दोबारा से यहां से भी मैंने सेव करनी है। क्योंकि दूसरी मंजिल के ऊपर मिट्टी लेकर आना उठाकर तो तो बहुत मुश्किल होता है। इसलिए जहां तक हो सके कोशिश करें मिट्टी को बचाने की। और जब मिट्टी खत्म हो जाएगी मेरे पास फिर मैं नई मिट्टी नहीं लेकर आऊंगा बल्कि सॉफ्ट मीडियम यानी पॉटिंग सोइल का हम इस्तेमाल करेंगे जिसमें मिट्टी का एक जर्रा भी नहीं होगा सिर्फ कंपोस्ट होगी कोकोपीट होगी परलाइट होगी इस तरह का मीडियम हम बनाकर अपनी सब्जियां लगाया करेंगे वो आने वाले टाइम में लेकिन जो पहले वाली चीजें हैं हमारे पास हम पहले उनको यूटिलाइज करेंगे अब मैं चलता हूं थक गया हूं अगली वीडियो में मिलेंगे तब तक अपना बहुत सारा ख्याल रखिएगा खुदा हाफिज और हां अगर आप हमारी पेड मेंबरशिप लेना चाहते हैं ₹500 ₹00 मंथली होगा। हमारे WhatsApp के ऊपर आप अपने पौधों की परेशानियां डिस्कस कर सकते हैं। उसका हल क्या है? पौधों को क्या प्रॉब्लम चल रही है? गार्डनिंग से रिलेटेड आप कोई भी सवाल हमसे पूछ सकते हैं। सिर्फ ₹500 फीस पे करना पड़ेगी आपको मंथली। एक महीने की मेंबरशिप ले लीजिए या फिर जब तक आपका दिल चाहे। मेंबरशिप लेने के लिए डिस्क्रिप्शन बॉक्स में लिंक मौजूद है और कमेंट बॉक्स में भी उस वीडियो का लिंक शेयर कर दूंगा। उसको वॉच कर लीजिए। आपके सारे सवालों के जवाब उसमें मिल जाएंगे कि आप कैसे मेंबरशिप ले सकते हैं।

20 Comments
چھوٹی بوتلیں سوراخ دار بنا کے پانچ چھ ریزڈ بیڈ میں دنا دیں اور انکو پانی سے بھر دیں
Wow soooooo healthy vegetables plants collection and beautiful 😍
Bohot zabardast
Izhar bhai agar muli bahir ban rahi ha to abhi isko miti kai andar dubaya ja sakta ha kia takay sahi sai ban jai?
I love 💕 you izhar bhi ❤
Visit🎉everyone
Inshaallah😂
bhi many tamoto ko baj k sat lagya tha 17 day ho gy ha wo bari ungli k saz k howy ha pr in k color paila pr gya ha is k bary my bata dy
Me mitti nahi chanti fir bhi achi vegetables achi hoti h
many tiles ki banai hain kiari choti c
❤❤❤👍💗💓💞💝💚💙💙
Sir ap in rose plants ko sirf Pani dalte hai ya koi khad bhi dete hai ?
बहुत सुंदर garden भाई जी 🌱🌱🌱✔️🌱🌱🌱
❤❤❤❤❤❤ information post❤❤❤❤❤
Bhai apny thrmacol box ly ao un me b sabzi ache lagti hy
بہت خوب
aeroponic tower k barey mein bhe videos banaein na bhiot chal rahe sirf ap he guide kar saktey haib
Anaar ka Plant tha Aapk pass wo Kahan hai Ada?
Sach batao tou house plants se kahe Guna behtar hai vegetables plants Hume both acha lagta hai vegetables plants video dekh
Haqeeqat tou ye hai mere pas Sirf Kuch he house plants hai baqi sub vegetables plants
Gardening Karna bilkul asan hai gumle aur mitti you sab ke pas hai baqi kitchen waste se khad banao Apne organic pesticide banao aur vegetables enjoy karo❤❤🥒🥒🥕🥕 izhar bhai humare teacher hai hum unke students🙏